Sunday, June 16, 2024

The Revolt of 1857 | 1857 का विद्रोह कारण, महत्व और परिणाम for upsc, bpsc,bpsc teacher

1857 का विद्रोह कारण, महत्व और परिणाम

1857 का विद्रोह / The Revolt of 1857

  • 1857 का विद्रोह लॉर्ड कैनिंग के उप राजशाही काल में हुआ था।
  • 1857 'के विद्रोह को 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' या 'सिपाही विद्रोह' कहा जाता है।
  • 10 मई 1857 को विद्रोह मेरठ से शुरू हुआ, और दिल्ली, पूरे उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत को कवर किया, दक्षिण भारत शांत रहा, और पंजाब और बंगाल केवल मामूली रूप से प्रभावित हुए।
  • सैनिकों ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया और 82 वर्षीय बहादुर शाह ज़फ़र को शहंशाह-ए-हिंदुस्तान घोषित कर दिया।

1857 के विद्रोह का कारण / Cause of Revolt of 1857

  • 1857 के विद्रोह का कारण अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ सदियों से चला आ रहा भेदभाव और शोषण था।
  • विद्रोह के विविध राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य, धार्मिक और सामाजिक कारण थे। 

1857 के विद्रोह के राजनीतिक कारण / Political Causes

  • 1857 के विद्रोह का सबसे महत्वपूर्ण कारण ब्रिटिश कब्जे की नीतियां थीं, जिन्होंने बड़ी संख्या में शासकों और प्रमुखों के राज्य छीन लिए। 
  • 1856 में कुशासन के आरोप में अवध पर कब्ज़ा कर लिया गया।
  • सतारा, झाँसी, नागपुर और संभलपुर को 'हड़प नीति के सिद्धांत' के आधार पर लिया गया।

1857 के विद्रोह के आर्थिक कारण /Economic Causes

  • ब्रिटिश आर्थिक नीतियों ने समाज के सभी वर्गों को आहत किया। 
  • ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों ने कई किसानों को अपनी जमीनें बेचने के लिए मजबूर किया।
  • कारीगर और शिल्पकार बर्बाद हो गए, क्योंकि अंग्रेजों ने कारखाने में निर्मित उनके सामान सस्ते दरों पर बेच दिया, जिसके परिणामस्वरुप हाथ से बने सामान का उत्पादन अलाभकारी हो गया। 
  • स्थायी बंदोबस्त, रैयतवारी व्यवस्था और महलवाड़ी व्यवस्था जैसी भू-राजस्व प्रणाली में उच्च करों की मांग की जाती थी। 

1857 के विद्रोह के सैन्य कारण / Military Causes

  • भारतीय सैनिकों को उनके ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा हीन दृष्टि से देखा जाता था और उनके साथ अवमानना का व्यवहार किया जाता था।
  • अधिकारियों की तुलना में बहुत उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों की तुलना में बहुत कम वेतन दिया जाता था। सभी उच्च पद और पदोन्नतियाँ ब्रिटिश अधिकारियों के लिए आरक्षित थीं।
  • 29 मार्च 1857 को 34वीं रेजिमेंट के एक भारतीय सिपाही मंगल पांडे ने बैरकपुर (कलकत्ता) में परेड के दौरान दो ब्रिटिश अधिकारियों-ह्यूजेसन और बॉघ को मार डाला।
  • उपस्थित भारतीय सैनिकों ने मंगल पांडे को गिरफ्तार करने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। हालाँकि बाद में मंगल पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया, उन पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें फाँसी पर लटका दिया गया। उनकी खबर पूरे देश में फैल गई जिसके परिणामस्वरूप लखनऊ, अंबाला, बरहामपुर और मेरठ में सिपाही विद्रोह हुआ।

1857 के विद्रोह कारण प्रभाव

  • 10 मई 1857 को मेरठ में सैनिकों ने नई एनफील्ड राइफल कारतूसों को छूने से इनकार कर दिया। कारतूस चर्बी लगे कागज के कवर से ढके हुए थे। 
  • कारतूस को राइफल में लोड करने से पहले ग्रीस लगे कवर को काटना पड़ता था। खबर फैल गई कि चर्बी गाय और सूअर की चर्बी से बनी है।
  • हिंदू गाय को पवित्र मानते हैं और मुसलमान सुअर का मांस नहीं खाते हैं। इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों की भावनाएं आहत हुई।
  • सैनिकों ने नागरिकों के साथ मिलकर 'मारो फिरंगी को' चिल्लाते हुए तोड़फोड़ की। उन्होंने खुली जेलें तोड़ दीं, यूरोपीय लोगों की हत्या कर दी, उनके घर जला दिए और दिल्ली तक मार्च किया। 

1857 के विद्रोह के सैन्य धार्मिक कारण / Religious Causes

  • विद्रोह भड़कने का एक कारण लोगों में यह डर था कि ब्रिटिश सरकार उनके धर्म को नष्ट करना चाहती है और भारतीयों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करना चाहती है।
  • सामाजिक कारण / Social Causes अंग्रेजों ने भारतीय समाज में कई सामाजिक सुधार लागू किये।
  • सती प्रथा का उन्मूलन, विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, महिलाओं को शिक्षा, कन्या भ्रूण हत्या और मानव बलि का दमन आदि सुधारों को देश के सामाजिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप के उदाहरण के रूप में देखा गया।
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Tuesday, June 11, 2024

18 Lok Sabha Election 2024 Mantralay Distributation PDF Download

18वीं लोकसभा चुनाव में किसको कौन सा मंत्रिमंडल मिला

लोकसभा के सभी 543 सीटों पर लोकसभा सदस्यों को चुनने के लिए पूरे भारत में 19 अप्रैल से 1 जून 2024 तक चुनाव सात चरणों में हुए।

Modi Cabinet 2024 : List of Cabinet Ministers in NDA Government

लोकसभा के सभी 543 सिटो पर लोकसभा सदस्यों को चुनने के लिए पुरे भारत में 19 अप्रैल से 1 जून 2024 तक चुनाव सात चरणों में हुए।

18वीं लोकसभा के परिणाम के लिए वोटों की गिनती 4 जून की गई और परिणाम घोषित किया गया।
जिसमे NDA को बहुमत प्राप्त हुआ |

543 सीटों वाले विधायीकी सदन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ कुल 293 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया| जिसमें भाजपा की 240 सीटें शामिल थीं और भाजपा पार्टी ने अपना एकमात्र बहुमत खो दिया।

जबकि भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDIA) 234 सीटें मिलीं, जिसमें कांग्रेस पार्टी की 99 सीटें शामिल थीं।
9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने NDA गठबंधन के नेता होने के नाते तिसरी बार लगातार प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली |

Cabinet Ministers of India 2024

भारत के राष्ट्रपति ने, प्रधानमंत्री की सलाह पर, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के निम्नलिखित सदस्यों के बीच विभागों के आवंटन का निर्देश दिया है:- 

Modi Cabinet 2024 : List of Cabinet Ministers in NDA Government

प्रधानमंत्रीमंत्रालय
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री तथा निम्न मंत्रालयों के प्रभारीः कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय; परमाणु ऊर्जा विभाग; अंतरिक्ष विभाग; सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे; और अन्य सभी विभाग, जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।


क्रम संख्या कैबिनेट मंत्री मंत्रालय
1. श्री राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री
2. श्री अमित शाह गृह मंत्री; और सहकारिता मंत्री।
3. श्री नितिन जयराम गडकरी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री।
4. श्री जगत प्रकाश नड्डा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री; तथा रसायन और उर्वरक मंत्री
5. श्री शिवराज सिंह चौहान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री; और ग्रामीण विकास मंत्री।
6. श्री एच. डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग मंत्री; और इस्पात मंत्री।
7. श्रीमती निर्मला सीतारमण वित्त मंत्री; और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री।
8. डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर विदेश मंत्री
9. श्री मनोहर लाल आवासन और शहरी कार्य मंत्री; तथा ऊर्जा मंत्री
10. श्री पीयूष गोयल वाणिज्य और उद्योग मंत्री।
11. श्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री
12. श्री जीतन राम मांझी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री।
13. श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पंचायती राज मंत्री; तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री।
14. श्री सर्बानंद सोनोवाल पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री।
15. डॉ. वीरेंद्र कुमार सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री।
16. श्री किंजरापु राममोहन नायडू नागर विमानन मंत्री।
17. श्री प्रल्हाद जोशी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री; तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री।
18. श्री जुएल ओराम जनजातीय कार्य मंत्री।
19. श्री गिरिराज सिंह वस्त्र मंत्री।
20. श्री अश्विनी वैष्णव रेल मंत्री; सूचना एवं प्रसारण मंत्री; तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री।
21. श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया संचार मंत्री; तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री।
22. श्री भूपेंद्र यादव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री।
23. श्री गजेंद्र सिंह शेखावत संस्कृति मंत्री; तथा पर्यटन मंत्री।
24. श्रीमती अन्नपूर्णा देवी महिला एवं बाल विकास मंत्री
25. श्री किरेन रिजिजू संसदीय कार्य मंत्री; तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्री।
26. श्री हरदीप सिंह पुरी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री
27. डॉ. मनसुख मांडविया श्रम एवं रोजगार मंत्री; तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री।
28. श्री जी. किशन रेड्डी कोयला मंत्री; तथा खान मंत्री।
29. श्री चिराग पासवान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री।
30. श्री सी. आर. पाटिल जल शक्ति मंत्री।



18 Lok Sabha Election 2024 Mantralay Distributation PDF Download 

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Monday, June 10, 2024

Jean Piaget Theory of Cognitive Development PDF Download

Jean Piaget Theory of Cognitive Development PDF

पियाजे का सिद्धान्त pdf download | Theory of Piaget in hindi pdf

पियाजे का सिद्धान्त pdf का डाऊनलोड लिंक नीचे हैं 👇👇

संज्ञान (Cognition) :-

Thursday, June 6, 2024

Stages of child development pdf download in hindi | बाल विकास की अवस्थाएँ का pdf

बाल विकास अवस्थाएं (Stage of Child Development)

1. प्रसवपूर्व (Pre-natal Stage)

2. शैशवास्था (Infancy)

3. पूर्व बाल्यावस्था (Early Childhood)

4. बाल्यावस्था (Later Childhood)

5. किशोरावस्था (Adolescence)

बाल विकास अवस्थाएं का pdf का डाऊनलोड लिंक नीचे हैं 👇👇

1. प्रसवपूर्व (Pre-natal Stage)  (9 महीना या 280 दिन) 

यह अवस्था माता के गर्भाधान (Conception) से शुरू होती है।

2. शैशवास्था (Infancy Stage) (जन्म 2 वर्ष):-

इसे निम्न नामों से जाना जाता है

i. जीवन का सबसे Important काल

ii. भावी जीवन की आधार शिला

iii. सुन्दर जीवन की नींव रखने की अवस्था

iv. दोहराने की अवस्था (Imitation)

v. प्रिय लगने वाली अवस्था (Adorable Period)

vi. इस अवस्था में शिशु पूर्ण रूप से माता-पिता पर निर्भर रहता है उसका व्यवहार मूल प्रवर्तियो पर आधारित होता है।

vii. तेज शारीरिक, मानसिक, अधिगम की अवस्था

viii. नैतिकता (morality) का आभाव होता है।

3. पूर्व बाल्य अवस्था (Early Childhood Stage) (2-6 वर्ष)-

इस अवस्था को निम्न नामों से जाना जाता है :-

1. पूर्व विद्यालयी आयु

2. नर्सरी स्कूल ऐज

3. अतार्किक चिन्तन (Illogical) की अवस्था

4. इसमें बच्चा अनुकरण (Imitation) द्वारा सीखता है।

5. इस अवस्था में जिज्ञासा (curiosity) ज्यादा होती है।

6. इस अवस्था को खिलौनों की आयु (Toy age) कहा जाता है।

7. यह भाषा अर्जन के लिए संवेदनशील चरण (sensitive period) है

8. इस अवस्था में बच्चा कल्पनाशीलता वाले games में active रूप से भाग लेता है।

इस अवस्था की Speciality

1. जीववाद (Animism)- बच्चा सजीव और निर्जीव में अंतर नही कर पता नहीं है।

जैसे - किसी बच्चे को अगर दरवाजे से चोट लग जाए तो आप दरवाजे को पीटेंगे तो बच्चा चुप हो जायेगा। बच्चा बोलेगा की और मारो इसे।

अगर धरती पर गिर जाए तो धरती को पीटेंगे तो फिर बच्चा चुप हो जायेगा।

2. स्वकेन्द्रित / अहंवादी / आत्मेन्द्रित Self-centered / egoistic / self centred – इसमें बच्चा यह सोचता है जो हम सोचते हैं या करते है वही सब करें।

जैसे कोई बच्चा कार्टून विडियो देख रहा है तो वही सब देखे ।

3. अक्षर लिखना, गिनती गिनना, रंगों को पहचानना Writing letters, counting numbers, recognizing colors

4. अनुत्क्रमणशीलता (IrReversibility)- इस अवस्था में बच्चा चीजों को उलटना पलटना को

नहीं सिख पता है।

जैसे - बच्चो को आप घर से स्कूल ले जाइए और स्कूल जानें के बाद बच्चा से पूछेंगे की अब तब स्कूल से घर चले जाना तो बच्चा बोलेगा की हमें घर का रास्ता पता नहीं हैं। मैं घर नहीं जा पाऊंगा यहीं irreversibility का गुण होता है।

जैसे - बच्चा यह समझ नही पता है कि पानी से बर्फ बनता हैं और बर्फ से पानी ।

जैसे - एक ही मात्रा का पानी को दो अलग मोटे चौड़े और पतले लेबे ग्लास में पानी समान हैं यह समझ नहीं पाता है।

5. आडीपस व एलेक्ट्रा ग्रन्थि का विकास Development of Odipus and Electra gland

6. जिज्ञासा प्रवृति (Curiosity nature) इस अवस्था में बच्चो में जिज्ञासा की प्रवृति अधिक होती हैं।

7. अनुकरण द्वारा सीखना Learning by imitation

इस उम्र के बच्चों में यह गुण भी होता है।

जैसे - बच्चा यह समझ नही पता है कि पानी से बर्फ बनता है और बर्फ से पानी ।

जैसे - एक ही मात्रा का पानी को दो अलग मोटे चौड़े और पतले लेबे ग्लास में पानी समान हैं यह समझ नहीं पाता है।

4. उत्तर बालव्यवस्था / बालव्यवस्था (later childhood or childhood)(6-12)-

1. इस अवस्था की Speciality :-

ii. प्रारम्भिक विद्यालय की आयु (Elementary school age)

iii. इसे आरम्भिक स्कूल की age कहा जाता हैं।

iv. मूर्त चिन्तन की अवस्था (Age of Concrete thinking)

v. प्रतिद्वन्दात्मक समाजीकरण का काल (Competitive Socialization age)

vi. मिथ्या परिपक्वता का काल (Pseudo-maturity age)

vii. उत्पाती अवस्था भी कहा जाता हैं।

viii. इसे तार्किक चिंतन (logical thinking) की अवस्था कहा जाता है।

ix. इसे 'गन्दी अवस्था' कहा जाता है।

x. इसे स्फुर्ति की अवस्था या smart age कहा जाता है।

xi. इसे खेलो की अवस्था Games Stage कहा जाता है।

xii. इस अवस्था में संग्रहण (storage) की प्रवृति विकसित होने लगती है।

xiii. इसे टोली / समहू / gang की अवस्था कहा जाता है।

xiv. इसे जीवन का अनोखा काल (unique period) कहा जाता है।

5. किशोरावस्था (Adolescence) (12/13 18 वर्ष):-

इसे निम्न नामों से जाना जाता है-

i. जीवन का सबसे कठिन काल कहा जाता हैं। (The most Difficult period of life)

ii. किशोरावस्था एक परिवर्ती अवस्था होती है। (Adolescence is a transitional period)

iii. इसे जीवन का सबसे कठिन काल कहा जाता है।

iv. इसे संघर्ष, तनाव, आंधी तूफ़ान और उलझन की अवस्था कहा जाता है।

v. इसमें विषभलिंगी आकर्षक होता है।

vi. इस अवस्था को स्वर्ण काल या golden age कहा जाता है।

vii. इस अवस्था में वीर पूजा (Hero Worship) की भावना होती है।

viii. इस अवस्था में बच्चे अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) करते है।

बाल विकास की अवस्थाएँ का pdf का डाऊनलोड लिंक 👇👇


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बाल विकास की अवस्थाएँ pdf download | Stages of child development in hindi

  बाल विकास अवस्थाएं (Stage of Child Development)

1. प्रसवपूर्व (Pre-natal Stage)

2. शैशवास्था (Infancy)

3. पूर्व बाल्यावस्था (Early Childhood)

4. बाल्यावस्था (Later Childhood)

5. किशोरावस्था (Adolescence)

बाल विकास अवस्थाएं का pdf का डाऊनलोड लिंक नीचे हैं 👇👇

1. प्रसवपूर्व (Pre-natal Stage)  (9 महीना या 280 दिन) -

यह अवस्था माता के गर्भाधान (Conception) से शुरू होती है।

2. शैशवास्था (Infancy Stage) (जन्म 2 वर्ष):-

इसे निम्न नामों से जाना जाता है

i. जीवन का सबसे Important काल

ii. भावी जीवन की आधार शिला

iii. सुन्दर जीवन की नींव रखने की अवस्था

iv. दोहराने की अवस्था (Imitation)

v. प्रिय लगने वाली अवस्था (Adorable Period)

vi. इस अवस्था में शिशु पूर्ण रूप से माता-पिता पर निर्भर रहता है उसका व्यवहार मूल प्रवर्तियो पर आधारित होता है।

vii. तेज शारीरिक, मानसिक, अधिगम की अवस्था

viii. नैतिकता (morality) का आभाव होता है।

3. पूर्व बाल्य अवस्था (Early Childhood Stage) (2-6 वर्ष)-

इस अवस्था को निम्न नामों से जाना जाता है :-

1. पूर्व विद्यालयी आयु

2. नर्सरी स्कूल ऐज

3. अतार्किक चिन्तन (Illogical) की अवस्था

4. इसमें बच्चा अनुकरण (Imitation) द्वारा सीखता है।

5. इस अवस्था में जिज्ञासा (curiosity) ज्यादा होती है।

6. इस अवस्था को खिलौनों की आयु (Toy age) कहा जाता है।

7. यह भाषा अर्जन के लिए संवेदनशील चरण (sensitive period) है

8. इस अवस्था में बच्चा कल्पनाशीलता वाले games में active रूप से भाग लेता है।

इस अवस्था की Speciality

1. जीववाद (Animism)- बच्चा सजीव और निर्जीव में अंतर नही कर पता नहीं है।

जैसे - किसी बच्चे को अगर दरवाजे से चोट लग जाए तो आप दरवाजे को पीटेंगे तो बच्चा चुप हो जायेगा। बच्चा बोलेगा की और मारो इसे।

अगर धरती पर गिर जाए तो धरती को पीटेंगे तो फिर बच्चा चुप हो जायेगा।

2. स्वकेन्द्रित / अहंवादी / आत्मेन्द्रित Self-centered / egoistic / self centred – इसमें बच्चा यह सोचता है जो हम सोचते हैं या करते है वही सब करें।

जैसे कोई बच्चा कार्टून विडियो देख रहा है तो वही सब देखे ।

3. अक्षर लिखना, गिनती गिनना, रंगों को पहचानना Writing letters, counting numbers, recognizing colors

4. अनुत्क्रमणशीलता (IrReversibility)- इस अवस्था में बच्चा चीजों को उलटना पलटना को

नहीं सिख पता है।

जैसे - बच्चो को आप घर से स्कूल ले जाइए और स्कूल जानें के बाद बच्चा से पूछेंगे की अब तब स्कूल से घर चले जाना तो बच्चा बोलेगा की हमें घर का रास्ता पता नहीं हैं। मैं घर नहीं जा पाऊंगा यहीं irreversibility का गुण होता है।

जैसे - बच्चा यह समझ नही पता है कि पानी से बर्फ बनता हैं और बर्फ से पानी ।

जैसे - एक ही मात्रा का पानी को दो अलग मोटे चौड़े और पतले लेबे ग्लास में पानी समान हैं यह समझ नहीं पाता है।

5. आडीपस व एलेक्ट्रा ग्रन्थि का विकास Development of Odipus and Electra gland

6. जिज्ञासा प्रवृति (Curiosity nature) इस अवस्था में बच्चो में जिज्ञासा की प्रवृति अधिक होती हैं।

7. अनुकरण द्वारा सीखना Learning by imitation

इस उम्र के बच्चों में यह गुण भी होता है।

जैसे - बच्चा यह समझ नही पता है कि पानी से बर्फ बनता है और बर्फ से पानी ।

जैसे - एक ही मात्रा का पानी को दो अलग मोटे चौड़े और पतले लेबे ग्लास में पानी समान हैं यह समझ नहीं पाता है।

4. उत्तर बालव्यवस्था / बालव्यवस्था (later childhood or childhood)(6-12)-

1. इस अवस्था की Speciality :-

ii. प्रारम्भिक विद्यालय की आयु (Elementary school age)

iii. इसे आरम्भिक स्कूल की age कहा जाता हैं।

iv. मूर्त चिन्तन की अवस्था (Age of Concrete thinking)

v. प्रतिद्वन्दात्मक समाजीकरण का काल (Competitive Socialization age)

vi. मिथ्या परिपक्वता का काल (Pseudo-maturity age)

vii. उत्पाती अवस्था भी कहा जाता हैं।

viii. इसे तार्किक चिंतन (logical thinking) की अवस्था कहा जाता है।

ix. इसे 'गन्दी अवस्था' कहा जाता है।

x. इसे स्फुर्ति की अवस्था या smart age कहा जाता है।

xi. इसे खेलो की अवस्था Games Stage कहा जाता है।

xii. इस अवस्था में संग्रहण (storage) की प्रवृति विकसित होने लगती है।

xiii. इसे टोली / समहू / gang की अवस्था कहा जाता है।

xiv. इसे जीवन का अनोखा काल (unique period) कहा जाता है।

5. किशोरावस्था (Adolescence) (12/13 18 वर्ष):-

इसे निम्न नामों से जाना जाता है-

i. जीवन का सबसे कठिन काल कहा जाता हैं। (The most Difficult period of life)

ii. किशोरावस्था एक परिवर्ती अवस्था होती है। (Adolescence is a transitional period)

iii. इसे जीवन का सबसे कठिन काल कहा जाता है।

iv. इसे संघर्ष, तनाव, आंधी तूफ़ान और उलझन की अवस्था कहा जाता है।

v. इसमें विषभलिंगी आकर्षक होता है।

vi. इस अवस्था को स्वर्ण काल या golden age कहा जाता है।

vii. इस अवस्था में वीर पूजा (Hero Worship) की भावना होती है।

viii. इस अवस्था में बच्चे अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) करते है।


Tuesday, June 4, 2024

पियाजे का सिद्धान्त pdf download | Theory of Piaget in hindi pdf

पियाजे का सिद्धान्त | Jean Piaget Theory 
पियाजे का सिद्धान्त pdf download | Theory of Piaget in hindi pdf

पियाजे का सिद्धान्त pdf का डाऊनलोड लिंक नीचे हैं 👇👇

संज्ञान (Cognition) :-

जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत । Cognitive Deveopment Theory

Concept of Cognitive Development :-

जीन पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की प्रकिया में मुख्यतः दो बातों को महत्वपूर्ण माना है। पहला संगठन दूसरा अनुकूलन।

सीखना – संगठन और अनुकूलन, आत्मसात्करणसमायोजन, साम्यधारणस्कीमा (Schema)

1. संगठन (Organisation) :- पियाजे के सिद्धांत में संज्ञानात्मक प्रणाली के लिए स्कीमाओं को पुनर्व्यवस्थित करना, उन्हें स्कीमाओं से जोड़ने को संगठन कहा जाता है।

2. अनुकूलन (Adaptation) :- वातावरण के अनुसार अपने आप को ढालना अनुकूलन कहलाता है। इस प्रक्रिया को दो भागों में बांटा गया है।

3. आत्मसात्करण (Assimilation) :- पूर्व ज्ञान को नए ज्ञान जोड़ना आत्मसात्करण कहलाता है।

4. समायोजन (Accommodation) :- पूर्व ज्ञान में परिवर्तन करके वातावरण के साथ तालमेल बिठाना समायोजन कहलाता है।

3. साम्यधारण / संतुलन (Equilibration) :- इसके द्वारा बच्चा आत्मसात्करण और समायोजन की प्रक्रियाओं के बीच संतुलन कायम करता है।

4.स्कीमा (Schema) :– मानव के दिमाग में जो चीज़े पहले से स्टोर होती है वह उनका प्रयोग करके किसी विषय के प्रति एक धारना बनाता है तो इसे स्कीमा कहते है। मानव शिशु में स्कीमा प्रवृत्ति और प्रतिक्रिया जन्म जात होती है।

पियाजे की चार अवस्थाएं कौन कौन सी हैं?

जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त को 4 अवस्था में बाटा गया है 

संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाएँ :-

1.संवेदिक पेशीय अवस्था (Sensory Motor Stage) : जन्म से 2 वर्ष

2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage) : 2-7 वर्ष

3. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) : 7 से 11वर्ष

4. अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) : 11 से 18 वर्ष

1. संवेदी पेशीय अवस्था /Sensory Motor Stage :- (0 – 2 वर्ष)

2. पूर्व संक्रियात्मक अवस्था / Pre Operational Stage ( 2-7 वर्ष) : –

इस अवस्था में बालक स्वकेन्द्रित व स्वार्थी न होकर दूसरों के सम्पर्क से ज्ञान अर्जित करता है। वह खेल, अनुकरण, चित्र निर्माण तथा भाषा के माध्यम से वस्तुओं के संबंध में अपनी जानकारी अधिक से अधिक बढ़ाता है। वह धीरे-धीरे प्रतीकों को ग्रहण करने लगता हैं , किन्तु किसी भी कार्य का क्या संबंध होता है तथा तार्किक चिन्तन के प्रति कोई क्रिया नहीं कर पता हैं । इस अवस्था में अनुक्रमणशीलता पायी जाती है। इस अवस्था मे बालक के अनुकरणो मे परिपक्वता आ जाती है

Piaget theory of cognitive development in hindi pdf

(i) जीववाद ( Animism):- जब बच्चा सजीव और निर्जीव वस्तुओं में अंतर नहीं कर पाता ठीक है।

(ii) अहंकेंद्रित (Egocentrism ) :- जब बच्चा यह सोचना शुरू कर देता है की जो वह कर रहा है, सोच रहा है, वह सब ठीक है।
(iii) अपलटावी (Irreversibility ) :- इसमें बच्चा वस्तुओ, संख्याओं, समस्या आदि को उलटना पलटना नहीं सीखता ।
Eg – 4 + 6 = 10
6+4= ?

(iv) मुद्रा संप्रत्यय, दूरी, भार, ऊंचाई, क्रम निर्धारण की योग्यता आदि के concept की कमी इसी अवस्था में होती है।

(v) केन्द्रीकरण (centration) :- एक समय में किसी वस्तु की केवल एक विशेषता पर ध्यान दे पाने की प्रवृत्ति को centration कहते है।
(vi) संरक्षण (conservation ):- अगर किसी वस्तु के size या shape में change करदे तो उसकी quantity पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन बच्चा इसको समझ नहीं पाता।
जैसे रोटी बनाने में आटे की गोले को बच्चो को दिखा कर उसका रोटी बनाने के बाद पूछेंगे की आटे को गोला बड़ा है या रोटी तो वह नही बता पायेगा।
(vii) क्रमबद्धता (seriation):- इसमें बच्चा वस्तुओं / तथ्यों को उनके आकार में रखना नहीं सीख पाता है।

3. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था / concrete operational stage (7-11 वर्ष ) :-

इस अवस्था में बालक विद्यालय जाना प्रांरभ कर देता है और वस्तुओं एव घटनाओं के बीच समानता, भिन्नता समझने की क्षमता उत्पन हो जाती है इस अवस्था में बालकों में संख्या बोध, वर्गीकरण, क्रमानुसार व्यवस्था किसी भी वस्तु ,व्यक्ति के मध्य पारस्परिक संबंध का ज्ञान हो जाता है। वह तर्क करने लगता है, और वह अपने चारों ओर के पर्यावरण के साथ अनुकूल करने के लिये अनेक नियम को सीख लेता है।

4. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था /Formal Operational Stage :- ( 11-15 वर्ष )

यह अवस्था 12 वर्ष के बाद की है इस अवस्था की विशेषता निम्न है :-

पियाजे के सिद्धांत की आलोचना: –

पियाजे के सिद्धांत की आलोचना : – पियाजे ने मानसिक विकास के चरणों के क्रम को अपरिवर्तनशील बताया है लेकिन अगर बच्चो को अच्छा वातावरण दिया जाये तो वह अपनी अवस्था की क्षमता से अधिक सीख सकता है।

पियाजे का भाषा पर विचार :- विचार पहले आता हैं बाद में भाषा ।

निजवाक् (Ego centrism) :- जब बच्चा कोई काम करते हुए या खेलते हुए जो स्वयं से बातचीत करता है, गुनगुनाते रहता हैं, उसे Ego centrism कहते हैं।

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